कैमूर जिले में वन विभाग की भूमि में अवैध तरीके से हेरफेर कर निजी लोगों के नाम दाखिल-खारिज करने का गंभीर मामला उजागर हुआ है। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर कराई गई उच्चस्तरीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी अभिलेखों में जानबूझकर छेड़छाड़ कर वन भूमि को निजी संपत्ति के रूप में दर्ज कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार वन विभाग की कुछ जमीनों को लेकर लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि इनका गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराकर जमाबंदी कायम कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता और अवर निबंधक की संयुक्त टीम से विस्तृत जांच कराई। जांच के दौरान राजस्व अभिलेखों, निबंधन कागजात और पुराने दस्तावेजों की पड़ताल की गई, जिसमें यह बात सामने आई कि संबंधित भूमि मूल रूप से वन विभाग की है, लेकिन कागजों में हेरफेर कर इसे निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया।
जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने भूमि के वास्तविक स्वरूप की पुष्टि किए बिना ही प्रविष्टियां कर दीं। न तो वन विभाग से अनापत्ति ली गई और न ही अभिलेखों का सही मिलान किया गया। इसके कारण सरकारी संपत्ति पर अवैध दावा स्थापित करने का रास्ता बन गया।
अनियमितता उजागर होने के बाद प्रशासन ने संबंधित जमाबंदी को रद्द करने की दिशा में कदम उठा दिया है। अपर समाहर्ता के न्यायालय में विधिवत वाद दायर कर दिया गया है, ताकि गलत तरीके से की गई प्रविष्टियों को निरस्त किया जा सके। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जल्द ही इन जमीनों को पुनः वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
कैमूर के जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच में दाखिल-खारिज की प्रविष्टियां पूरी तरह त्रुटिपूर्ण पाई गई हैं। जिन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि वन भूमि प्राकृतिक संपदा है और इसकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो, इसके लिए राजस्व अभिलेखों की नियमित निगरानी और सख्त सत्यापन व्यवस्था लागू की जाएगी। इस कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या कागजी हेरफेर करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।